शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

अपीलों का जिन्न

उत्तर प्रदेश में राज्य सूचना आयोग ने एक तरह से हाथ खड़े कर दिए हैं कि अब हम इन लोक सूचना अधिकारियों का कुछ नहीं कर सकते। यह हताशा सूचना के राज्य के सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सक्सेना ने बनारस में सूचना अधिकार पर आधरित कार्यक्रम में व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में हरेक आयुक्त 30 से लेकर 100 केस रोज़ाना सुनता है लेकिन इसके बावजूद लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती चली जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में सूचना का अधिकार का इस्तेमाल करने वाले 90 प्रतिशत लोगों को राज्य सूचना आयोग में जाना पड़ता है। जिससे आयोग का काम लगातार बढ़ता जा रहा है।
सवाल यह है कि आखिर लोक सूचना अधिकारियों की यह हिम्मत बढ़ाई किसने है? सूचना न देने वाले अधिकारियों पर ज़ुर्माना न लगाना और सूचना आयोग में आम नागरिकों के को डांटना डपटना किसने किया था? इस पर अगर लोक सूचना अधिकारियों का नहीं तो क्या राज्य के आम नागरिकों का हौसला बढे़गा?

17 टिप्‍पणियां:

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

यह सब एक पुरानी सोची समझी मुहिम है मामले को इतना टालो की उसका दम निकल जाए। इस कानून में यह व्यवस्था होनी चाहिए की समय पर सूचना न देने पर अपने आप जुर्माना चालू हो जाए।

बेनामी ने कहा…

mahesh sinha ji ki bat se main sahmat hoon.

rcm ने कहा…

लोक सूचना अधिकारी यदि धारा ४ को सूचना सार्वजनिक करदे तो इसका समाधान हो सकता है।

सत्य नारायण उपाध्याय ने कहा…

मेरा केस 2011 से आयोग में लम्बित है लोक सूचना अधिकारी को उनके कहने पर हर बार नई तारीख मिल जाती है एक बार तो सूचना आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी को सिर्फ मौखिक परीक्षा के ९० नम्बर जोड़ने के लिये २१ दिन का समय दिया और उन्हें तारीख पे तारीख दी जा रही हैं जो सन्देह उत्पन्न करती है इस प्रकार आयोग पर अपील कर्ता बोझ बढ़ा रहे हैं या फिर आयोग ही स्वयं अपने ऊपर बोझ बढा रहा है

बेनामी ने कहा…

ग्राम सेवा सहकारी समिति के बारे मे सूचना

Anees Kumar ने कहा…

सच कह रहें हैं श्रीमान आप पिछले एक साल से RTI से जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करता आ रहा हूँ लेकिन मुझे लगता है कि कोई जवाब नहीं मिलने वाला है।

Mantu ने कहा…

In sab ko seva samapti ka notice do. Khud sudhR jayenge

Mantu ने कहा…

Mi khadya avam Rasad vibhag se suchna many raha hu deta hi nahi hai.

Mantu ने कहा…

Mi khadya avam Rasad vibhag se suchna many raha hu deta hi nahi hai.

Mantu ने कहा…

In sab ko seva samapti ka notice do. Khud sudhR jayenge

Sundar Lal Saudiyal ने कहा…

रजिस्ट्री ru५७३३४५८५९.
१८/०२/२९१७,
सैनिक पत्र प्रमाण माना जा सकता है या नहीं यूनिट व पोष्ट की मुहरयुक्त ओप एरिया का
आर्मीआर्डर तेरह क्या है ।
+९१९४१०२७०२६५
हिन्दू धर्मगुरु
मेरठ

Darshana Kumari ने कहा…

S.b.i. se Janna he ki cheque book kitne smya me bhejta hen. V 4 bje bank men cheque book Kylie rimaindr bhi NHi Lia ja akta he kya.

Girjashankar Yadav ने कहा…

Sir मैने B.S.A बलिया u.p से विकलागो को नौकरी मे किस प्रकार से आरक्षण देने पर किस नियम का पालन किया गया है ।
2 बार रजीस्सटरी कि पर जवाब नहीं मिला है क्या करु अब no 9307759940

vijay vashistha ने कहा…

utter pardes me to koi suchna dena hi nhi chahta

Unknown ने कहा…

तहसीलदार इकौना श्रावस्ती के कार्यालय में काफी 12 वर्सॅ से तैनात राजस्व लिपक की तीन बिन्दुओ मे उसके स्थानान्तरण न होने के कार्णों की जानकारी चाही थी चार माह वीत जाने के वाद भी जानकारी नही मिली तो इसकी शिकायत जन सुवाई पोर्टल पर किया । मेरा आनलाइन शिकायत क्रमाॅक 40018117002517 है।परन्तु शिकायत आवेदन खारिज कर दिया गया है । क्या यह ठीक है यदि नहीं तो वैसा क्यो किया जाता है ।

Rajendra Kumar Yadav ने कहा…

इसका मुझे खेद है ।

Rajendra Kumar Yadav ने कहा…

सेवा में ,
मा. मुख्य मन्त्री जी ,
उत्तर प्रदेश शासन
लखनऊ ।
विषय: जनसुनवाई प्रकरणों की रेंडम चेकिंग कराये जाने के सम्बन्ध में ।
महोदय ,
जनपद श्रावस्ती स्तर से उत्पन्न कतिपय जन समस्याओं की त्वरित /समयावद्ध्य निस्तारण के लिए

माननीय मुख्यमंत्री जी जनसुनवाई में आने वाले प्रकरणों को विभागवार छांटकर संबंधित कलक्टर से इनकी जानकारी मांगी जाए कि उनके स्तर पर इन प्रकरणों का निस्तारण क्यों नहीं हुआ। माननीय मुख्यमन्त्री जी कृपा पूर्वक आप द्वारा इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक उपखण्ड अधिकारी अपनेे क्षेत्र में आमजन की शिकायतों को पूरी गम्भीरता से सुनें ताकि छोटे-छोटे मामलों में लोगों को जिलाधिकारी तक चक्कर नहीं काटने पड़े।

पूर्वर्ती समाजवादी सरकार द्वारा आमजन की शिकायतों के निस्तारण के लिए विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारी तय की गई हैं और इस व्यवस्था की सभी कड़ियां आपस में जुड़ी हुई हैं। किसी भी कड़ी के कमजोर पड़ने पर पूरी व्यवस्था सही प्रकार से काम नहीं कर पाएगी और लोगों को राहत देने में मुश्किल होगी।

जनसुनवाई में आने वाले प्रकरणों की रेंडम चेकिंग हो। ताकि आमजन की शिकायतों को दूर करने में किसी तरह की लापरवाही न हो।माननीय मुख्यमंत्री जी जनपद श्रावस्ती अति पिछडा क्षेत्र है इस लिए यहाॅ के लोगों की समस्याएं पूरी आत्मीयता और संवेदनशीलता से सुनी जाय।

उन्होंने जनसुनवाई के दौरान राजस्व, पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी, बिजली, खान, ग्रामीण विकास, पुलिस एवं स्थानीय निकायों से संबंधित मामलों में तत्काल ही मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए जांय ताकि जनसुनवाई में आए लोगों को राहत मिल सके।

राजस्व परिवादों का निस्तारण तीव्र गति से हो
पूर्व अखिलेश समाजवादी राजय सरकार द्वारा न्याय आपके द्वार अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तर तक लगाई गई राजस्व लोक अदालतों से अतिक्रमण तथा राजस्व सम्बन्धी अन्य परिवादों का बड़ी संख्या में निस्तारण हुआ था। वर्षों से लम्बित राजस्व परिवादों की संख्या को देखते हुए जिला कलक्टरों को इनके निस्तारण में तेजी लाने के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कलक्टरों के लिए निर्देश दिए कि अवैध खनन एवं चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामलों को गम्भीरता से लें तथा नियमानुसार त्वरित कार्यवाही करने का कष्ट
करें।
सधन्यवाद ।
दिनाॅक 16 -10 - 10 -2017
आवेदक
राजेन्द्र कुमार यादव
इकौना श्रावस्ती ।