मंगलवार, 22 जुलाई 2008

बैंक ने किया गरीब किसानों से छल

सुखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड क्षे़त्र के बांदा जिले के गरीब किसानों पर एक तरफ प्रकृति ने कहर बरपा रखा है वहीं दूसरी तरफ बैंक भी किसानों को बदहाली की और धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सूचना के अधिकार के जरिए बांदा जिले के त्रिवेणी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अनेक प्रकार की अनियमितताएं उजागर हुईं हैं। आरटीआई के माध्यम से जो सूचनाएं मिली हैं उनसे पता चला है कि इस बैंक ने क्षेत्र के गरीब किसानों के साथ बहुत बड़ा छल किया है।

अप्रैल 2008 में आवेदक राजा भईया यादव द्वारा दायर आरटीआई के माध्यम से पूछा गया था कि इस सूखेग्रस्त जिले के जिन किसानों के क्रेडिट कार्ड बनें हैं, उनकी फसल का बीमा किया गया है या नहीं। यदि बीमा नहीं हुआ है तो इसकी वजह बताएं। आवेदन में उन किसानों की संख्या भी पूछी गई जिन्हें दावा राशि का भुगतान किया गया था।

आरटीआई आवेदन का कोई जवाब नहीं मिलने पर मई में प्रथम अपील दायर की गई। प्रथम अपील से जो जवाब मिले वह आधे-अधूरे थे। प्रथम अपील में जो सूचनाएं उपलब्ध कराईं उसमें यह तो स्वीकार कर लिया गया कि किसी किसान को दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया है। लेकिन मांगी गई अन्य सूचनाएं नहीं दी गईं।

अन्तत: मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने बैंक को निर्देशदिए कि आवेदक द्वारा मांगी गई सूचनाओं को तुरंत उपलब्ध कराए। सूचना आयोग के आदेश का असर हुआ और किसानों के खातों में करीब 1 करोड़ रूपये की राशि स्थानांतरित कर दी गई।


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